संघ विधान

 

 

नाम -इस संस्था का नाम मालू जैन भाईपा समाज संस्थान बाड़मेर होगा इस संस्था को आगे मालू भाईपा समाज के नाम से सम्बोधित किया जायेगा
कार्यक्षेत्र - इस मालू भाईपा समाज का कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण राजस्थान होगा 


मुख्य कार्यालय - इस संस्था का मुख्य कार्यालय जैन न्याति नोहरे के गली बाड़मेर( राजस्थान) होगा लेकिन राजस्थान के सदस्यों के सुविधा एवम आवश्यकतानुसार विभन्न शाखाएँ अन्यत्र भी खोली जा सकेगी, जो कि साधारण सभा की स्वीकृति से खोली जायेगी


संचालन - इस संस्था का संचालन इस विधान में वर्णित अनुसार प्रबंध समिति द्वारा किया जायेगा|


भाषा - कार्य संचालन की मुख्य भाषा  हिंदी  होगी |

 

उद्देश्य - 

* मालू भाईपा समाज के सभी सदस्यो के सामाजिक आर्थिक धार्मिक नैतिक बौद्विक एवम शैक्षणिक आदि विकास हेतु कार्य करना और सपूर्ण मालू भाईपा समाज की सर्वागीण उन्नति ,प्रगति एवम विकास में योगदान देना 

* मालू भाईपा समाज के सभी सदस्यों में परस्पर भाईचारा , प्रेम स्नेह सदभावना सहयोग , समन्वय बढ़ाने का प्रयास करना और समाज को संगठित करते हुए उसकी मन मर्यादा की रक्षा करना

* मालू गोत्र में सामाजिक रीती रिवाज एवं रूढ़ियो में आवश्यक परिवर्तन एवम सुधार करना तथा संस्था की महिलाओं के विकास उच्च शिक्षा में उन्हें प्राप्ति की दिशा प्रेरित करना तथा सामाजिक कार्यक्षेत्र में भाग लेने आदि के लिए प्रोत्साहित करना

* मालू भाईपा समाज की चल एवं अचल सम्पतियो की देख भाल करना ,सुरक्षा करना , उसकी समुचित व्यवस्था करना तथा इन सम्पतियो के उपयोग -उपभोग से सम्बधित हर कार्य करना जो संस्था के हितार्थ हो

* मालू गोत्र की कुलदेवी के मंदिर व धर्मशाला का निर्माण करना एवम उसका संचालन , व्यवस्था आदि का प्रबन्ध करना

* मालू भाईपा समाज के हितार्थ आवश्यक एवम उचित अन्य ऐसे कार्य करना जिससे मालू समाज को उत्थान व उन्नति हो सके

* मालू भाईपा समाज के हितार्थ धार्मिक , ज्ञानोपर्जन , शोध व् जैन संस्कृति के प्रचार प्रसार व शिक्षा आदि के लिए भवन निर्माण आदि का कार्य करना व इस ओर कदम उठाना

उपरोक्त उद्देश्यों के अतिरिक्त संघ के अनुकरणीय कार्य करने वाले व्यक्तियों सदस्यों का सम्मान करना

मालू भाईपा समाज के युवक -युवतियों के उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु पूर्ण सहयोग व विदेश जाने हेतु आवश्यकतानुसार सहयोग ंदेना व इस हेतु प्रेरित करना 
उपरोक्त उदेश्यो के समकक्ष ऐसी सभी कार्य करना जो समाज के सर्वागीण विकास हेतु मालू भाईपा समाज समय समय पर निश्चित करे तथा उपरोक्त तमाम उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यक निधि का स्थापना - संग्रह व उपयोग करना

उपरोक्त उद्देश्यों में कोई लाभ निहित नहीं है 


सदस्यता एवम सदस्यता शुल्क 

* भारत वर्ष में रहने वाले समस्त मालू जाति गौत्र व्यक्ति इस मालू भाईपा समाज के सदस्य होंगे जिन्होंने नियमानुसार फॉर्म भरकर सदस्यता शुल्क आदि जमा करवा दी है और प्रबंध समिति द्वारा उसे स्वीकृत कर दिया गया हो मालू गोत्र के प्रत्येक परिवार के मुखिया द्वारा यानि मालू जैन परिवार के चूल्हा अनुसार सदस्य बनाये जायगे और प्रत्येक चूल्हा अनुसार 101 ध्- अक्षरे एक सौ एक रुपये आजीवन सदस्य्ता शुल्क होगी द्य प्रत्येक मालू गौत्र के संयुक्त परिवार के मुखिया को अपने परिवार के सदस्यों की सूची मय सदस्य्ता फॉर्म भर कर देना अनिवार्य होगा तथा समय समय पर चूल्हो में परिवर्तन होने की स्थिति में संस्था को सूचित करना अनिवार्य होगा|


सदस्यों के कर्तव्य दायित्व 

* मालू भाईपा समाज का प्रत्येक सदस्य संस्था विधान तथा विधान के अंतर्गत बनाये गये नियमो व उपनियमो आदि का पालन करेगा तथा संस्था के उद्देश्यों को कार्यरूप देने को पूर्ण प्रयत्नशील होगा व रहेगा एवम किसी भी नियमो व उपनियमो निर्देशों का उलंघन नहीं कर सकेगा अन्यथा संस्था को सदस्यता समाप्त करने का संस्था को पूर्ण अधिकार होगा संस्था के सदस्यों की सदस्यता निम्न कारणों से प्रभावी नहीं रहेगी और उस पर कार्य कारणि प्रबंध समिति को निर्णय करने का अधिकार होगा 

*सदस्य द्वारा त्याग पत्र देने पर 
* स्वर्गवास होने पर सक्षम न्यायलय द्वारा पागल या दिवालिया घोषित होने पर 
* संस्था की किसी भी संपत्ति पर अनधिकृत कब्जा करने पर 
* सक्षम न्यायलय द्वाराअनैतिक आचरण के कारण दण्डित करने पर 
* संघ सभा द्वारा निष्कासित किये जाने पर 
* प्रबंध समिति के निर्देशों की अवेलहना करने अथवा अनुशासनहीनता करने पर 


सदस्यों के अधिकार 

* मालू गौत्र के प्रत्येक सदस्य को समाज की संघ सभा की बैठक में उपस्थित होने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार होगा किसी भी पद के लिए प्रत्याशी बनने एवम मत देने का अधिकार होगा |
संस्था के हित में कार्य करने ,परामर्श ,प्ररेणा व सहयोग देने तथा प्रस्तावित विषयो पर चिंतन , मनन विवेचन करने एवम संस्थान की उन्नति के लिए प्रस्ताव रखने का अधिकार होगा |

संघ सभा 
* समाज के सभी पंजीकृत सदस्यों की एक संघ सभा होगी समाज की सर्वोत्तम सत्ता इस सभा में निहित होगी |

* संघ सभा की साधारण बैठक संभवत वर्ष में एक बार होगी और इसका कोरम 51 सदस्यों का होगा संघ सभा की साधारण बैठक बुलाने की सूचना कम से कम 15 दिन पूर्व भेजनी होगी|

असधारण सभा 

* इसके अतिरिक्त संघ सभा की जो बैठक बुलाई जावेगी। व असाधारण बैठक कहलायेगी इसमें साधरण बैठक के प्रावधान लागू होंगे 

संघ सभा के कर्तव्य एवम अधिकार 
* प्रबंध समिति के पदाधिकारीयो का निर्वाचन करना , मार्ग दर्शन देना ,नियंत्रण रखना प्रस्तुत प्रस्तावों पर निर्णय देना तथा आगामी वर्ष के लिये बजट पारित करना वार्षिक आय व्यय एवम प्रगति प्रतिवदेन स्वीकार करना द्य इस विधान में संशोधन परिवर्तन करना , किसी की सदस्यता समाप्त किये जाने की स्थिति में उसके द्वारा लिखित में अपील प्रस्तुत करने पर उस पर विचार कर अंतिम निर्णय पारित करना तथा विधान में वर्णित समस्त अधिकार साधारण सभा में निहित होंगे

* मालू भाईपा ंसमाज द्वंारा दिनांक 12- 3 -2000 को बाड़मेर में आयोजित अखिल भारतीय मालू भाईपा समाज के सम्मलेन में उक्त संस्था के संरक्षक चुने गए थे जो यथावत रहेंगे तथा भविष्य में साधारण सभा द्वारा जिन जिन को संस्था का संरक्षक चुना जायेगा , वे संस्था के संरक्षक कहलायेगे |संरक्षक को प्रबंध समिति की बैठक में विशेष रूप से आमंत्रित किया जा सकेगा साधारण सभा द्वारा विशेष परिस्थितयो में संरक्षक को हटाया जा सकेगा 

प्रबंध समिति कार्यकारणी 

* मालू भाईपा समाज को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए एवम संस्था के विधान के अंतर्गत संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कार्य करने के लिए प्रबंध समिति का गठन किया जायेगा जिसके सदस्यो की कुल संख्या 25 होगीद्य उसके निम्न पदाधिकारी समिति द्वारा चुने अथवा मनोनीत किये जायेगे 
प्रबंध समिति का कार्यकाल तीन वर्ष होगा 


*अध्यक्ष -1 
* वरिष्ठ उपाध्यक्ष - 1 
* उपाध्यक्ष -5 
* सचिव - 1 
* सहसचिव -1 
* कोषाध्यक्ष -1 
* सहकोषाध्यक्ष -1


* गत प्रबंध समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ उपाध्यक्ष सचिव नई प्रबंध समिति के मनोनीत सदस्य होंगे 
* पांच सदस्यों का सह वरण प्रबंध समिति द्वारा किया जा सकेगा 
* शेष सदस्यों का निर्वाचन ध् मनोयन संघ विधान संघ सभा अथवा उसके द्वारा अधिकृत पदाधिकारी समिति द्वारा किया जायेगा 
* प्रबंध समिति में चुनाव के लिए प्रत्येक चुल्हावार परिवार से केवल एक सदस्य को किसी पद के लिए प्रत्याशी बनने एवं मत देने का अधिकार होगा 
* प्रबंध समिति का गठन यथा संभव सर्व सम्मति से किया जायेगा अन्यथा चुनाव किये जायगे


प्रबंध समिति के अधिकार व कर्तव्य 

* इस विधान व संस्था के अधीन रहते हुए संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति करना व इस हेतु आवश्यक नियम उपनियम बनाना 

* सभी निर्णय सर्वसमत्ति अथवा बहुमत से किये जायेगे समान मत आने पर अध्यक्ष का मत निर्णायक होगा 

* प्रबंध समिति की बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे उनकी अनुपस्थिति में उपस्थिति सदस्य किसी सदस्य को चुनकर अध्य्क्षकता करा सकेंगे 
* प्रबंध समितो की बैठकों में यदि सचिव उचित समझे तो अध्यक्ष की अनुमति से बाहर के व्यक्तियों को भी विशेष रूप से आमत्रित कर सकेंगे 
* लेकिन विशेष रूप से आमत्रित व्यक्तियों को मतदान का अधिकार नहीं होंगा 
* संघ सभा की साधारण एवम असधारण सभा की बैठक बुलाना उसके लिए व्यवस्था करना, वार्षिक वित्तीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करना 
*संस्था की ओर से समाज की सम्पति व गतिविधियों के लिए आवश्यक कार्यवाही करने का अधिकार होगा
*प्रबंध समिति की बैठक आवश्यकतानुसार बुलाना और बैठक की सूचना विशेष परिस्थितयो को छोड़कर कम से कम 15 दिन पहले सभी सदस्यों को भेजनी होगी ?सूचना में विषय सूची स्थान वे समय का उल्लेख करना होगा प्रतिवर्ष कम से कम तीन बैठक बुलाना अनिवार्य होगा 
*प्रबंध समिति का कोई सदस्य यदि लगातार तीन बैठक में बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहता है तो आगामी बैठक में उसकी सदस्यता समाप्त करने पर विचार कर उसके स्थान पर नए सदस्य का चयन प्रबंध समिति द्वारा किया जा सकेगा 
*किसी सदस्य की मृत्यु होने पर उसका स्थान रिक्त माना जायेगा और उसकी पूर्ति प्रबंध समिति द्वारा की जायेगी 

*सदस्य द्वारा लिखित में त्याग पत्र देने एवं प्रबंध समिति द्वारा स्वीकृति देने पर ही उस सदस्य का स्थान रिक्त माना जायेगा और उसके स्थान पर नए सदस्य का चयन भी प्रबंध समिति द्वारा किया जायेगा 

*प्रबंध समिति के रिक्त हुए पदों की पूर्ति अथवा नये सदस्यों का चयन प्रबंध समिति के शेष सदस्यों द्वारा सर्व सम्मति अथवा तीन चैथाई बहुमत से किया जा सकेगा 

*प्रबंध समिति अगर उचित समझे तो कार्य के सुचारु संचालन हेतु एक या अधिक समितियों ध् उप समितियों गठित कर सकेगी और ऐसी समितियों ध्उप समितियों में एक संयोजक होगा तथा शेष सदस्यो की संख्या पांच से अधिक नहीं होगी और इन समितियों के कार्यकलाप एवम अधिकार प्रबंध समिति द्वारा निर्धारित व निश्चित किये जावेगे 

*संस्था की तमाम चल व अचल सम्पतियो का संरक्षण व्यवस्था व विनियोजन का कार्य करना 

*अधीनस्थ न्यायलय से लेकर उच्च न्यायलय तक तथा समस्त सरकारी अर्ध सरकारी कार्यालयो विभागो अथवा स्थानीय निकायों में तमाम् कानूनी कार्यवाहियां करना , आपसी समझौते करना ,अधिवक्ता नियुक्त करना ,,कानूनी कार्यवाहियों को सुचारु रूप में चलाने हेतु पैरवी करने हेतु किसी सदस्य ध्पदाधिकारी को विशेष रूप से अधिकृत करना आदि से संबधित कार्य करना 

* संस्था का कार्य सुचारु रूप से चलाने हेतु कर्मचारियों की नियुक्ति करना व उनके परिश्रिमिक तय करना , उनको दंडित या पदमुक्त करना 

* ऐसे समस्त अधिकार , जो संघ सभा द्वारा विशेष तौर से प्रबंध समिति को प्रदत किये जाये उनका प्रयोग करना


अध्यक्ष के अधिकार एवं कर्तव्य 

* संघ सभा की वार्षिक साधारण बैठक , असाधारण बैठक प्रबन्घ समिति की बैठक बुलाने की व्यवस्था करना एवम उसकी अध्यक्षता करना |

* समाज जे उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विधान के अनुसार कार्य करना|

* प्रबंध समिति के पदाधिकारियों का समय समय पर कार्य सौपना तथा उन कार्यो पर निगरानी रखना संघ सभा या प्रबंध समिति द्वारा प्रदत अधिकारों का उपयोग करना |

* समान मत आने के स्थिति में निर्याणक मत देना |

वरिष्ठ उपाध्यक्ष के अधिकार एवम कर्तव्य


* अध्यक्षकी अनुपस्थिति में ,स्थान रिक्त होने या उनके द्वारा लिखित रूप से त्याग पत्र दिए जाने पर अध्यक्ष के समस्त आधिकारो का प्रयोग करना व कर्तव्यों का निर्वहन करना एवम अध्यक्षअथवा प्रबंध समिति द्वारा प्रदत आधिकारो का प्रयोग करना एवम कर्तव्यों का निर्वहन करना

* आवश्यकता समझे जाने पर सचिव को संघ सभा की साधारण असाधारण बैठक एवं प्रबंध समिति की बैठक बुलाने के निर्देश देना 

* राजकीय एवं कानूनी प्रावधानों की पालना करने के लिये सभी प्रकार की कार्यवाही एवम व्यवस्था कराना 

* स्वीकृत व्यय के अंतर्गत एवं एअक समय में एक मद में 5000/-- रूपये ता व्यय की स्वीकृति देना और अनिवार्य होने पर अथवा विशेष परिस्थितियो में अधिक राशि व्यय करनी पड़े तो वह राशि व्यय कर उस राशि के सम्पुष्टि तुरंत अगली प्रबंध समिति बैठक में कराना है 

* विभिनं समितियों एवं उपसमितयों के कार्य में कोई कमी। कठिनाई अथवा बाधा हो तो उसकी पूर्ति एवम निवारण हेतु नियमानुसार कार्यवाही करना 


सचिव के अधिकार एवम कर्तव्य 

* मालू भाईपा समाज के कार्यलय का मुख्य प्रभारी होगा 

* संस्था के सभी कार्यो पर दृष्टि रखना तथा व्यवस्था के मुख्य उत्तरदायित्वो का निर्वहन करते हुये विधान की प्रतिष्ठा व उसकी मर्यादा बनाये रखना 

* अध्यक्ष की आज्ञा से संघ सभा की वार्षिक साधारण व असाधारण बैठक , प्रबंध समिति के बैठक बुलाना और इन बैठकों में सचिव के पद पर कार्य करना 

* प्रत्येक सभा एवं बैठकों की कार्यवाही लेखनबद्ध करना ,अध्यक्ष से अनुमोदित करवाकर हस्ताक्षर करवाना एवं उसकी पुष्टि करवाना 

* सभी बैठकों में लिये गए निर्णयों को क्रियान्वित करने के लिए उचित कार्यवाही करना 

* संस्था की ओर से पत्र व्यहवहार करना 

* संस्था की चल अचल सम्पतियो की सुरक्षा एवं संवर्धन करना तथा अध्यक्ष की पूर्व अनुमति से सम्पतियो को किराये पर देना , किराया वसूल करना व उन्हें खाली करवाना तथा इस सम्बन्ध में आवश्यक कानूनी कार्यवाही करना संस्था के विरुद्ध अथवा संस्था कीओर से किसी प्रकार की कानूनी कार्यवाही , न्यायलयों ,सरकारी ध्स्थानीय निकायों अर्द्ध -सरकारी में इस सम्बन्ध में कार्यवाही करना तथा इसके लिए पैरवी करना तथा आवश्यकतानुसार अध्यक्ष से स्वीकृति प्राप्त करना किसी भी चल अचल सम्पति को किराये पर देने की पुष्टि प्रबंध समिति से करना आवश्यक होगा


* संस्था के लिए जरुरी सामान खरीदना एवम आवश्यकतानुसार सामान को बेचना द्य जिसकी अधिकतम कीमत 2000ध्-अखरे दो हजार रूपये तक हो इससे अधिक के समान खरीदने और बेचने से पूर्व प्रबन्ध समिति की लिखित स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होगा स्वीकृत बजट के अतिरिक्त वर्ष में दो हजार तक व्यय करना और ऐसे व्यय की पुष्टि प्रबंध समिति की आगामी बैठक में करना आवश्यक होंगा , लेकिन एक समय में एक मद में 500 ध्- अखरे पांच सौ रूपये तक व्यय करना व इससे अधिक की राशि व्यय करना आवयश्यक हो तो उसकी स्वीकृति अध्यक्ष से प्राप्त करनी आवश्यक होंगी

* संस्था के आय व्यय का समुचित हिसाब रखना व वाउचरों के भुगतान के लिए उचित आदेश प्रदान करना तथा आय व्यय के आंकड़ों को तैयार कर प्रबंध समिति में पारित करा कर संघ सभा के समक्ष प्रस्तुत करना 

* समाज के वार्षिक खर्च का अनुमानित बजट बनाकर प्रथमत प्रबंध समिति में प्रस्तुत कर उसे पारित करवाना तथा बाद में संघ सभा में प्रस्तुत कर पारित करवाना 

* संस्था से सदस्यों के सदस्यता शुल्क व अन्य सहयोग राशि प्राप्त करने की उचित व्ययस्था करना 
प्रबंध समिति द्वारा स्वीकृति पदों पर प्रबंध समिति की स्वीकृति से वैतनिक कर्मचारियों की नियुक्ति करना उन्हें पदचयुत करना ,अवकाश त्यागपत्र स्वीकार करना तथा उनकी वेतन वृद्धि स्वीकृत करना 

* संस्था का समस्त रिकार्ड पत्रावली एवं आवश्यक महत्वपूर्ण दस्तावेज आदि पर नियंत्रण रखना 

* ऐसे समस्त कार्य करना जो विशेष परिस्थितयो में अति आवश्यक हो उन्हें अध्यक्ष की सलाह अनुसार सम्पादन करना 

* साधारण सभा एवम प्रबंध समिति द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करना एवं कर्तव्यो का पालन करना


सह सचिव के अधिकार व कर्तव्य 

* सचिव की अनुपस्थिति में या पद रिक्त होने पर या उनके द्वारा लिखित रूप से त्याग पत्र दिये जाने पर , सचिव के समस्त अधिकारों का प्रयोग एवं कर्तव्यो का पालन करना तथा सचिव द्वारा प्रदत्त अधिकारों एवं कर्तव्यो का निर्वहन करना |


कोषाध्यक्ष के अधिकार व कर्त्तव्य 

* संस्था के समस्त आय- व्यय का हिसाब रखना और रखवाना , धन जमा कर रसीद देना और रसीदों के जरिये भुगतान करना व करवाना तथा समय समय पर प्रबंध समिति के निर्देशानुसार नियानुसार हिसाब रखना द्य समस्त हिसाब किताब वाउचरों रसीदों दस्तावेजों को सुरक्षित रखना |

* प्रबंध समिति के आदेशानुसार संस्था के धन को राष्ट्रीयकृत बैंको , अनुसूचित बैंको राष्ट्रीय बचत पत्रों व निधियों में जमा कराना तथा समस्त लेनदेन रखना |

* अध्यक्ष की अनुमति से आवश्यक व्यय करना |

* स्वीकृत बजट से अधिक रकम व्यय न हो इसका ध्यान रखना |

* अपने या व्यस्थापक के पास पांच हजार तक की राशि रख सकेंगे एक समय में एक मद में रूपये 500 अक्षरे पांच सौ तक व्यय करना व इससे अधिक राशि व्यय करनी आवश्यक हो तो इसकी स्वीकृति अध्यक्ष से लेनी होगी |

* संघ सभा की वार्षिक साधारण बैठक एवं असधारण बैठक में उपस्थित रहना |

* सस्था की बकाया राशि वसूल करना पत्र देना और वसूल ने होने पर सचिव अध्य्क्ष को सूचित करना|


* वार्षिक आय व्यय विवरण तैयार कर सचिव को दिखाना एवं प्रबंध समिति एवं संघ सभा की साधारण बैठक में प्रस्तुत करना |

* हिसाबी वर्ष की समाप्ति के तीन महीने की अवधि में नियुक्त ऑडिटर से संस्था के हिसाब की ऑडिट करवाकर प्रबध समिति में विचारार्थ प्रस्तुत कर पारित करवाना|

सहकोषाध्यक्ष के अधिकार व कर्त्तव्य 

* कोषाध्यक्ष की अनुपस्थिती में , पद रिक्त होने पर या उनके द्वारा त्याग पत्र देने पर , कोषाध्यक्ष के समस्त अधिकारों का प्रयोग करना व कर्तव्यो का पालन करना |

कोष 

* समाज का कोष किसी अनुसूचित या राष्ट्रीयकृत बैंक में राष्ट्रीय बचत पत्रों में मयदी खातों में जमा कराया जायेगा द्य अन्य किसी स्थान पर कोष की राशि जमा नहीं कराई जाएगी 

* राष्ट्रीयकृत या अनुसूचित बैंक में खाता मालू भाईपा समाज से खोला जायेगा और प्रबंध समिति के चार पदाधिकारी अध्य्क्ष, वरिष्ठ अध्य्क्ष ,सचिव तथा कोषाध्यक्ष में से किन्ही दो के हस्ताक्षरो से उसका संचालन किया जायेगा 

* उक्त खातों में धनराशि अध्य्क्ष वरिष्ठ अध्य्क्ष ,सचिव तथा कोषाध्यक्ष में से किन्ही दो के संयुक्त हस्ताक्षरो से निकली जायेगी 
राष्ट्रीय ध्अनुसूचित बैंक में मालू भाईपा समाज के बचत / चालू खाते में रूपये ज्यादा हो तो फिक्स डिपाजिट करा दी जाएगी

* समाज का हिसाब वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का होगा 

विधान में संशोधन , परिवर्तन एवं परिवर्धन 

* इस विधान में संशोधन , परिवर्तन एवं परिवर्धन केवल संघ सभा की साधारण बैठक में ही किया जा सकेगा और उपस्थित सदस्यों की तीन चैथाई बहुमत से ही किया जा सकेगा जो राजस्थान अधिनियम 1958 की धारा 12 के अनुरूप होगा साधारण बैठक में 51 से ज्यादा सदस्य उपस्थित होने चाहिए |

* इस विधान में संशोधन , परिवर्तन एवं परिवर्धन करने का प्रस्तावित प्रारूप साधारण सभा की विषय सूची के साथ विशेष रूप से अंकित करते हुये भेजा जायेगा |

* संस्था की सम्पति का अधिग्रहण व हस्तान्तरण तथा तमाम विधिक कार्यवाहियां |

* संस्था की समस्त चल व अचल सम्पत्तियो का अधिग्रहण हस्तान्तरण आदि संस्था के नाम से किया जायेगा तथा सक्षम न्यायालयो व कार्यालयो में सभी प्रकार की विधिक कार्यवाहियों संस्था के नाम से ही की जायेगी इस संस्था का प्रतिनिधित्व अध्यक्ष / सचिव द्वारा किया जा सकेगा |


संस्था का विघटन 

* संस्था का विघटन संबधी प्रावधान राजस्थान संस्था के पंजीकरण अधिनियम 1958 की धारा 13 व 14 के अनुसार होना वांछनीय है यदि संस्था का विघटन आवयश्यक हुआ तो संस्था की समस्त चल - अचल सम्पति सामान उद्देश्य वाली संस्था को हस्तांन्तरित कर दी जावेगी 

* प्रमाणित किया जाता है की उक्त विधान (नियमावली समिति संस्था की सही व सच्ची प्रति है