सर्व प्रथम दिनांक २० मई 1995 को निम्न मालू भाइयो की बैठक श्री हुकम चन्दजी मालू के घर हुई | जिसमे निम्न महानुभाव उपस्थित थे श्री इंद्र चंद्र जी व अन्य मालू भाई उपस्थित थे.
| . | श्री इंद्र चंद्र जी |
| श्री मुल्तानमल जी | |
| श्री हुकमी चन्द जी | |
| श्री आशुलाल जी | |
| श्री सुरतान मल जी | |
| श्री हेमराज जी | |
| श्री मोहन लाल जी | |
| श्री शेरमल जी | |
| श्री मुल्तानमल जी | |
| श्री मिश्रीमल जी | |
| श्री रिखबदास जी | |
| श्री आशुलाल जी |
उपस्थित सभी सदस्यों ने मालू भाइयो के संगठन हेतु एक संस्था बनाने हेतु विचार विमर्श किया एवं विचार विमर्श कर मालू भाइयों का एक संगठन बनाये जाने का निर्णय किया एवम उसका नाम अखिल भारतीय मालू जैन भाईपा संस्थान ,बाड़मेर रखा |एवं संस्थान के उद्देश्यों के सम्बन्ध में उपस्थित सदस्यों ने अपने अपने विचार रखे | सभी सदस्यों के विचारो पर गौर कर निम्न लिखित उद्देश्य पारित किये गए .
| * | मालू जाति के भाइयो का संकलन करना एवं पूरी जाती भाइयों का उत्थान करना |
| * | कुल देवी का पता लगाकर उसका मंदिर बनाना |
| * | मेधावी छात्रों को प्रोत्सान देकर भाइयो को एजुकेटेड करना |
| * | जरुरत मंदो को मेडिकल व अन्य हेल्प करना |
| * | मालू भाइयो की सहायता एवम सेवा करना |
| * | पूरे भारत के मालू परिवारों का समय समय पर स्नेह मिलन करना |
| * | मालू जाति के उदगम एवं इतिहास का पता करना एवं उसे परिवारों विवरण छपना |
| * | भाइयो के एड्रेस व फोन नंबर का संकलन करके फॉर्म बनाकर संस्था से जोड़ना |
इस प्रेरणा से उद्धबोध होकर उसी समय ट्रस्टी मीटिंग में उपस्थित महानुभावो ने तारीख 20 /05 /1995 अखिल भारतीय मालू भाईपा के समाज के नाम की संस्था बनाई | उसमे संपर्क सूत्र , पत्र व्यवहार व कार्यवाही संचालन के लिए श्री हुक्मीचंद जी मालू को कार्य सौपा निरन्तर प्रचार प्रसार व पत्र व्यवहार द्वारा 750 परिवारों लगा कर एड्रेस कलेक्शन किया गया
राजस्थान , गुजरात ,महाराष्ट्र ,आसाम , मध्य
प्रदेश , छत्तीसगढ़ व पूरे भारत में करीब पत्र
व्यवहार कर लेटरपैड भरी उसमे करीबन पूरे भारत में
के मालू भाइयो के नाम चिन्हित कर सर्व प्रथम
सम्मेलन बाड़मेर में सिद्धेश्वर महादेव सफ़ेद आंकड़ा
पर रखा गया | जिसमे पूरे भारत के भाइयो को बुलया
गया एवं सम्मेलन में ही नई कार्यकारणी बनाने का
प्रावधान आया | और हुक्मीचन्द जी मालू को अध्यक्ष
एवम श्री मांगीलाल जी मेहता को मंत्री बनाकर कार्य
करने का जिम्मा सौंपा गया |
कार्यकारणी में श्री इन्द्रचंद जी को संरक्षक बनाया
गया | उसके बाद संस्था लगातार आगे बढ़ती गई और कई
मालू परिवार जुड़ते गए | इस शृंखला में बाङमेर के
बाद में कई जगहों पर स्नेह मिलन सम्मेलन हुये |
नाकोड़ा जी , शंखेश्वर पार्श्वनाथ ,द्योलकाजी
गुजरात , ओसियां जी राजस्थान रणकपुर , मालपुरा ,
दादवाडी मेड़ता इस प्रकार इस प्रकार कई सम्मलेन हुये
एवम नै कार्यकारणीया बनती रही एवम मालू परिवार
जुड़ते रहे | इसी बीच संस्था का रजिस्ट्रेशन व
विधान बनाया गया | उसके बाद बाड़मेर बाङमेर में श्री
आशुलाल गोपचंद मालू पुत्र मांगीलाल जी मालू ,जगदीश
चंद मालू चौहटन वाले ने संस्था को जमीन भेट की |
जिस पर माँ संच्चियाय माता का भव्य मंदिर बन रहा
है | तथा कमरे ऑफिस प्याऊ ,धर्मशाला ,भोजन शाला
इत्यादि |
मालू परिवार का मूल स्थल बन रहा है मंदिर का
निर्माण कार्य श्रीमान महेंद्र कुमार पुत्र नगराज
जी सोमपुरा सादडी वालो देख रेख में हुवा | इस बढ़ती
सफलता से पूरे भारत के मालू भाइयो में हर्ष की लहर
है